किसानों का टिकरी मोर्चा – आंखों देखा हाल…

ग्रीन लाइन पर टिकरी कलान मेट्रो स्टेशन पहुंचते हीं अनाउंस हुआ "यह मेट्रो आगे नहीं जाएगी.."मेट्रो का एक कर्मचारी दौड़ता हुआ सभी यात्रियों को सूचित करने लगा।हमने पूछा "क्या आगे किसान आंदोलन के कारण नहीं जा रही?"वह मुस्कुराते हुए बोला "जी हां"।मेट्रो स्टेशन से जब बाहर निकला तो वहां कई मैक्सी वैन लगी हुई थी।"टिकरी,टिकरी,टिकरी..." … Continue reading किसानों का टिकरी मोर्चा – आंखों देखा हाल…

पर्यावरण,विकास और लोकतंत्र : ईंट भट्टे की नजर से…

मिडिल क्लास अपने जीवन में खुद का घर बनाने का सपना संजोता है।शहर में एक घर हो जाए यह उसकी तमाम ख्वाहिशों की सूची में सबसे ऊपर होती है।ऊंची इमारत,लोगों के घर बनाने के लिए तमाम चीजों की जरूरत पड़ती है,इन्हीं चीजों में दीवार उठाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'ईंट' है।ईंट बनती है ईंट भट्टे … Continue reading पर्यावरण,विकास और लोकतंत्र : ईंट भट्टे की नजर से…

गबन

प्रेमचंद का लिखा यह उपन्यास पाठक को अपने भीतर झांकने को विवश करता है।हमारे जीवन में स्वार्थ,दिखावा,प्रलोभन बहुत से समस्याओं का जड़ है।दिखावे की दुनिया में लोग अपनी जरूरत छोड़,इच्छा को ज्यादा महत्व देने लगें है।धनी दिखने की कोशिश में कर्ज का राह चुन लेते है।इस उपन्यास में मध्यम वर्ग की तमाम कठिनाइयों को दर्शाया … Continue reading गबन

आंदोलनकारी किसानों के बीच ‘लोकल’ राष्ट्रवादी…

विश्वगुरु भारत में पिछले कुछ सालों से एक आक्रमक राष्ट्रवादी भीड़ तैयार की गई है।यह भीड़ देश की सुरक्षा व संस्कृति को बचाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।हाथ में तिरंगा लिए यह भीड़ भारत माता की जय के नारों के साथ आती है और देश के गद्दारों को गोली मारने की सज़ा सुनाती है।पुलिस व … Continue reading आंदोलनकारी किसानों के बीच ‘लोकल’ राष्ट्रवादी…

मीडिया,सोशल मीडिया और किसान आंदोलन

संसद से जबरन पास हुए तीन कृषि कानून को रद्द करने कि मांग को लेकर किसान तीन महीने से आंदोलन कर रहें हैं।संविधान दिवस के मौके पर हरियाणा,पंजाब व पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में प्रदर्शन करने दिल्ली आ रहे किसानों को अग्निपरीक्षा से होकर गुजरना पड़ा।दिल्ली कि सीमाएं सील कर दी गई साथ … Continue reading मीडिया,सोशल मीडिया और किसान आंदोलन

मतदान से पहले प्रमुख दलों के घोषणा पत्र पर एक नज़र…

आने वाले 28 तारीख को पहले चरण में 71 सीटों पर मतदान होने वाला है।आज यानी सोमवार के शाम तक पहले चरण के चुनाव प्रचार का सिलसिला थम जाएगा।प्रचार के दौरान बेरोजगारी,शिक्षा,स्वास्थ्य, मजदूरों का पलायन इन सब लघु समस्याओं के साथ वृहत समस्या जैसे राम मंदिर,सेना,कश्मीर,आतंकी, ट्रिपल तलाक़,अनुच्छेद 370 कि भी ज़ोरदार चर्चा करने की … Continue reading मतदान से पहले प्रमुख दलों के घोषणा पत्र पर एक नज़र…

बेटी

क्यों जन्म लेना तो पाप नहीं, क्यों लेने देते सांस नहीं। बेटा करे कोई बात नहीं, बेटी को पड़ती डॉट रही। उसकी थी क्या इतनी गलती, की वह एक बेटी थी। पर बेटी होना श्राप नहीं, बेटी होना अपराध नहीं। उसका मान अब नहीं रहा, भारत भारत अब नहीं रहा। जहाँ रामायण जैसी कहानी थी, … Continue reading बेटी

चुनाव से पहले बिहार की तस्वीर।

चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव के तारीखों का एलान कर चुकी है।आने वाले 28 अक्टूबर,3 नवंबर और 7 नवंबर को तीन चरणों में मतदान होने वाले है।10 नवंबर को नतीजे कि घोषणा भी हो जाएगी।इस दौरान सीटों का बंटवारा,उद्घाटन और शिलान्यास का कार्यक्रम,नेताओं के उलट-पलट बयान,जीत का विश्वास,भविष्यवाणी कि शोर,टिकट का बंटना और फिलहाल नामांकन … Continue reading चुनाव से पहले बिहार की तस्वीर।

समकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था में गांधी की प्रासंगिकता।

वर्तमान समय में जब अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ती हीं जा रही है।समाज में गहरी आर्थिक असमानता बनी हुई है।आज़ादी के 73 साल बाद भी भोजन हमारी एक बड़ी आबादी के लिए समस्या बनी हुई है।भूख व कुपोषण से जानें चली जाती है।गरीबी व कर्ज के कारण हर साल हजारों किसान-मजदूर आत्महत्या कर … Continue reading समकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था में गांधी की प्रासंगिकता।

मन की बात।

चलो मान लिया,मन की बात! सत्तर साल हुए बर्बाद, सारी नीतियां थी खराब। पर तूने जो दिखाए ख्वाब, क्या वो पूरे हुए जनाब? चाय वाला का लिए खिताब, बातें कर गए बेहिसाब। ना हीं हुई आमदनी दुगनी, ना हीं मिला रोजगार। फिर धर्म का हुआ आगमन, मुद्दा बनकर आए भगवान। और ज्यों हीं आई अगली … Continue reading मन की बात।