मतदान से पहले प्रमुख दलों के घोषणा पत्र पर एक नज़र…

आने वाले 28 तारीख को पहले चरण में 71 सीटों पर मतदान होने वाला है।आज यानी सोमवार के शाम तक पहले चरण के चुनाव प्रचार का सिलसिला थम जाएगा।प्रचार के दौरान बेरोजगारी,शिक्षा,स्वास्थ्य, मजदूरों का पलायन इन सब लघु समस्याओं के साथ वृहत समस्या जैसे राम मंदिर,सेना,कश्मीर,आतंकी, ट्रिपल तलाक़,अनुच्छेद 370 कि भी ज़ोरदार चर्चा करने की … Continue reading मतदान से पहले प्रमुख दलों के घोषणा पत्र पर एक नज़र…

बेटी

क्यों जन्म लेना तो पाप नहीं, क्यों लेने देते सांस नहीं। बेटा करे कोई बात नहीं, बेटी को पड़ती डॉट रही। उसकी थी क्या इतनी गलती, की वह एक बेटी थी। पर बेटी होना श्राप नहीं, बेटी होना अपराध नहीं। उसका मान अब नहीं रहा, भारत भारत अब नहीं रहा। जहाँ रामायण जैसी कहानी थी, … Continue reading बेटी

चुनाव से पहले बिहार की तस्वीर।

चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव के तारीखों का एलान कर चुकी है।आने वाले 28 अक्टूबर,3 नवंबर और 7 नवंबर को तीन चरणों में मतदान होने वाले है।10 नवंबर को नतीजे कि घोषणा भी हो जाएगी।इस दौरान सीटों का बंटवारा,उद्घाटन और शिलान्यास का कार्यक्रम,नेताओं के उलट-पलट बयान,जीत का विश्वास,भविष्यवाणी कि शोर,टिकट का बंटना और फिलहाल नामांकन … Continue reading चुनाव से पहले बिहार की तस्वीर।

समकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था में गांधी की प्रासंगिकता।

वर्तमान समय में जब अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ती हीं जा रही है।समाज में गहरी आर्थिक असमानता बनी हुई है।आज़ादी के 73 साल बाद भी भोजन हमारी एक बड़ी आबादी के लिए समस्या बनी हुई है।भूख व कुपोषण से जानें चली जाती है।गरीबी व कर्ज के कारण हर साल हजारों किसान-मजदूर आत्महत्या कर … Continue reading समकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था में गांधी की प्रासंगिकता।

मन की बात।

चलो मान लिया,मन की बात! सत्तर साल हुए बर्बाद, सारी नीतियां थी खराब। पर तूने जो दिखाए ख्वाब, क्या वो पूरे हुए जनाब? चाय वाला का लिए खिताब, बातें कर गए बेहिसाब। ना हीं हुई आमदनी दुगनी, ना हीं मिला रोजगार। फिर धर्म का हुआ आगमन, मुद्दा बनकर आए भगवान। और ज्यों हीं आई अगली … Continue reading मन की बात।

अर्थव्यवस्था की बदतर स्तिथि।

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के द्वारा जारी किया गया हालिया रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच विकास दर में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई है।सरल शब्दों में इसे समझें तो पिछले साल यानी कि वित्तीय वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जितने वस्तु एवम् सेवाएं की अंतिम … Continue reading अर्थव्यवस्था की बदतर स्तिथि।

सबसे बरा खतरा एक इंसानी कट्टरवाद

इंसान की जिंदगी ही शुरू होती है एक संघर्ष के साथ जिसमे बहुत सारे कठिनाइयों का सामना करना परता है, चाहे वो एक छोटा सा बच्चा हो या बुजुर्ग| हमने वो कहानियां सुनी है और पढ़ी है जिसमे कहा जाता था की हमारे भारत देश मे वो भी एक समय था जब कोई इंसान किसी … Continue reading सबसे बरा खतरा एक इंसानी कट्टरवाद

आज़ाद देश में ‘आज़ादी’

"अब किस बात की आज़ादी चाहिए अंग्रेज़ तो चले गए?अपने लोगों से आज़ादी कि बात करते हो?देश तोड़ने की बात करते हो?आज़ाद हीं तो हो।आज़ाद नहीं रहते तो क्या बोल पाते,लिख पाते,आंदोलन करते?"ये प्रश्नोत्तर कुछ भोले-भाले लोगों के हैं।जो आज़ादी शब्द से घबराते हैं,इससे डरते हैं।इस बात से डरते हैं कि कहीं ये आज़ाद न … Continue reading आज़ाद देश में ‘आज़ादी’

मंदिर,मस्ज़िद और सियासत!

आज़ादी के लगभग ९० साल पूर्व से चली आ रही एक ज़मीन की लड़ाई जो कि एक स्थानीय मुद्दा थी,आज़ादी के ४० साल बाद पूरे देश में आस्था कि लड़ाई में तब्दील हो गई।तमाम राजनैतिक उठ- पटाक,नेताओं के बयानबाजी और सांप्रदायिक दंगो के साथ इसमें कई घटना क्रम जुड़ते गए।लोगों की आस्था में राजनीति का … Continue reading मंदिर,मस्ज़िद और सियासत!